भोपाल त्रासदी और उसके बाद
ढाई दशक हो गए करते तर्क कुतर्क
और ढाई लाख लोगों का हो गया बेड़ा गर्क
लोगों की ज़िन्दगी बना दी है नर्क
दिल्ली में सियासतदानों को पड़ता नहीं कोई फर्क
अगर सरकार को लगता है ७७०० करोड़ दिया जाना चाहिए पीड़ित जनता को
तो हम क्यों ताकें अमेरिका के वार्रेन अन्डर्सन के मुंह को
अगर सरकार वाकई चाहती है गैस पीड़ितों को हर्जाना देना
तो क्यों करती रहती है अनगिनत बहाना
आखिर सालाना बजट में होता है हज़ारों करोड़ का घाटा
जनता ७७०० करोड़ का और सह लेगी चांटा
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